હોળીની વધાઈ … ( કીર્તન ) …
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(१) कान्हा पिचकारी मत मार मेरे घर सास लडेगी रे।
कान्हा पिचकारी मत मार मेरे घर सास लडेगी रे।
सास लडेगी रे मेरे घर ननद लडेगी रे।
सास डुकरिया मेरी बडी खोटी, गारी दे ने देगी मोहे रोटी,
दोरानी जेठानी मेरी जनम की बेरन, सुबहा करेगी रे। कान्हा पिचकारी मत मार… ॥१॥
जा जा झूठ पिया सों बोले, एक की चार चार की सोलह,
ननद बडी बदमास, पिया के कान भरेगी रे। कान्हा पिचकारी मत मार… ॥२॥
कछु न बिगरे श्याम तिहारो, मोको होयगो देस निकारो,
ब्रज की नारी दे दे कर मेरी हँसी करेगी रे। कान्हा पिचकारी मत मार… ॥३॥
हा हा खाऊं पडू तेरे पैयां, डारो श्याम मती गलबैया,
घासीराम मोतिन की माला टूट पडेगी रे । कान्हा पिचकारी मत मार… ॥४॥
(२) बड़े भाग से फागुन आयो री



અશોકદાદા
હોળીની ખુબ ખુબ વધામણી.
આદરણીયશ્રી.
આપ અને આપના પરિવારને હોળી અને ધુળેટીની
હાર્દિક શુભકામનાઓ,
આપે સુંદર રચના મુકેલ છે.
ડૉ.કિશોરભાઈ એમ.પટેલ
હોળીની ખૂબ ખૂબ વધામણી. સરસ સંસારની વાત ગુંથી રંગોની વાત ઝીલાઈ છે.ફાગણનો
ફાગ માણે તે જાણે.સરસ પોષ્ટ.
રમેશ પટેલ(આકાશદીપ)